Masjid Zirar | मस्जिदे ज़िरार वह मस्जिद है जिसे पैगंबर मुहम्मद (PBUH)
इसके पीछे Short कहानी ये है कि अबू आमिर और उसके लोग इस्लाम के वफादार नहीं थे वो मुनाफ़िक़ थे और उनका इरादा नमाज़ के लिए एक मस्जिद बनाना नहीं था, बल्कि मुसलमानों के खिलाफ इसका इस्तेमाल करना था। उन्होंने मुसलमानों की हमदर्दी इकट्ठा करने के लिए इस मस्जिद बनाई ताकि वे उस समय पूरी आज़ादी के साथ मुसलमानों को अपने जाल में फंसा सके
मस्जिदे ज़िरार की पूरी कहानी
ये मस्जिद मदीना में मस्जिदे कुबा के पास थी । और इसका निर्माण अबू आमिर और उसके साथियों ने किया था। उनका दावा तो ये था कि वो मुसलमानों की हिफाज़त करना चाहते है और वो बीमार व परेशान हाल लोगों की मदद करना चाहते हैं लेकिन हकीकत में वो इस के पीछे नबी का खात्मा और मुसलमानों को जड़ से ख़त्म करना चाहते थे यहाँ तक कि अगर उनके बस में होता तो वो इस्लाम को सफ्हे हस्ती से मिटा देते |
जब मस्जिद बन गयी, तो अबू आमिर और उसके साथियों ने पैगंबर मुहम्मद PBUH को उस मस्जिद में नमाज़ के लिए बुलाया और कहा कि आप चल कर एक बार उस में नमाज़ पढ़ दें ताकि वो मुसलमानों में मकबूल मुतबर्रक हो जाये , चूंकि पैगंबर मुहम्मद (PBUH) को तबुक की लड़ाई के लिए जाना था, इसलिए उनसे कहा कि वह तबुक की लड़ाई से लौटने के बाद वहां नमाज़ पढेंगे
जब पैगंबर मुहम्मद (PBUH) तबूक की लड़ाई से लौट रहे थे तो यह तब कुरान शरीफ की आयत 9 : 107 उन पर नाज़िल हुई जिसने इस मस्जिद की सच्चाई का खुलासा किया था। और बताया कि ये मस्जिद असल में मस्जिद नहीं बल्कि मस्जिदे ज़िरार ( Masjide Ziraar ) है यानी नुकसान पहुँचाने की जगह है
उस आयत का तर्जुमा ये है
वापसी के बाद आप स.अ. ने दो आदमियों को मस्जिद को गिराने और जलाने का हुक्म दिया।
मस्जिद बनाने के पीछे क्या क्या वजहें थीं
- मुसलमानों को नुकसान पहुंचाना ज़िरार का मतलब है जानबूझ कर नुकसान पहुँचाना
- काफिरों की जड़ों को मज़बूत बनाना
- मुसलमानों की सफों में दरार डालना क्यूंकि अगर इस मस्जिद में कुछ लोग जमा होने लगते तो मस्जिदे कुबा की जो करीब में ही बनी थी और मस्जिदे नबवी की जो उस से कुछ दूर थी की रौनक ख़त्म हो जाती
- एक ऐसे शख्स के लिए एक मरकज़ कायम करना जो अल्लाह के रसूल के खिलाफ हमेशा से था वो अलग बात है की वो क़सम खाता था कि नेकी के अलावा उस का कोई इरादा नहीं
Aaj bhi shiyon ki masjid masjide zirar hai .