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Ayatul Kursi Hindi Translation | आयतुल कुर्सी हिन्दी तर्जुमे के साथ

Ayatul Kursi Hindi Translation 

आयतुल कुर्सी हिन्दी तर्जुमे के साथ

ayat-al-kursi-hindi me

अ ऊजु बिल लाहि मिनश शयतानिर रजीम

Au Zu Billahi Minash Shaytanir Rajeem

 

बिस मिल्ला हिर रहमानिर रहीम

Bis Milla Hir Rahmanir Raheem

आयतुल कुर्सी हिन्दी में

1. अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू

2. अल हय्युल क़य्यूम

3. ला तअ’खुज़ुहू सिनतुव वला नौम

4. लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़

5. मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इजनिह

6. यअलमु मा बैना अयदी हिम वमा खल्फहुम

7. वला युहीतूना बिशय इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ

8. वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़

9. वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा

10. वहुवल अलिय्युल अज़ीम

 

तर्जुमा | Ayatul Kursi Hindi Translation

1. अल्लाह जिसके सिवा कोई माबूद नहीं

2. वही हमेशा जिंदा और बाकी रहने वाला है

3. न उसको ऊंघ आती है न नींद

4. जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है

5. कौन है जो बगैर उसकी इजाज़त के उसकी सिफारिश कर सके

6. वो उसे भी जनता है जो मख्लूकात के सामने है और उसे भी जो उन से ओझल है

7. बन्दे उसके इल्म का ज़रा भी इहाता नहीं कर सकते सिवाए उन बातों के इल्म के जो खुद अल्लाह देना चाहे

8. उसकी ( हुकूमत ) की कुर्सी ज़मीन और असमान को घेरे हुए है

9. ज़मीनों आसमान की हिफाज़त उसपर दुशवार नहीं

10. वह बहुत बलंद और अज़ीम ज़ात है

 

Ayatul Kursi In English

1. Allahu La Ilaha Illa Hu

2. Al Hayyul Qayyoom

3. La Ta Khuzuhu Sinatuw Wala Naum

4. Lahu Ma Fis Samawati Wama Fil Arz

5. Man Zal Lazi Yashfau Indahu Illa Bi Iznih

6. Ya Alamu Ma Baina Aideehim Wama Khalfahum

7. Wala Yuheetoona Bishay’im Min Ilmihi Illa Bima Shaa…A

8. Wasia Kursiy yuhus Samawati Wal Arz

9. Wala ya ooduhu hifzuhuma

10. Wahuwal aliyyul azeem

आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत

आयतुल कुर्सी कुरान की सब से अज़ीम तरीन आयत है हदीस में रसूल स.अ. ने इसको तमाम आयात से अफजल फ़रमाया है |
हज़रत अबू हुरैरा र.अ. फरमाते हैं कि रसूल स.अ. ने फ़रमाया : सूरह बकरा में एक आयत है जो तमाम कुरान की आयातों की सरदार है जिस घर में पढ़ी जाये शैतान वहां से निकल जाता है |

आयतुल कुर्सी की ख़ासियत

इस सूरत में अल्लाह की तौहीद ( अल्लाह को एक मानना ) को साफ़ तौर पर बताया गया है और शिर्क को रद किया है |

इस आयत में 10 जुमले ( Sentences ) हैं

पहला जुमला : (अल्लाह जिसके सिवा कोई माबूद नहीं)

इस में अल्लाह इसमें ज़ात है जिस के मानी हैं वो ज़ात जिस के अन्दर तमाम कमाल पाए जाते हों और तमाम बुराइयों से पाक हो और उस के सिवा कोई माबूद नहीं |

दूसरा जुमला : (वही हमेशा जिंदा और बाकी रहने वाला है )

हय्य के मानी अरबी ज़ुबान में जिसको कभी मौत न आये हमेशा जिंदा रहने वाला और कय्यूम के मानी हैं जो खुद कायम रहे और दूसरों को भी कायम रखता और संभालता हो और कय्यूम अल्लाह तआला की ख़ास सिफत है जिस में कोई भी उस का शरीक नहीं क्यूंकि जो चीज़ें अपने बाक़ी रहने में दुसरे की मोहताज हों वो किसी दुसरे को क्या संभाल सकती हैं |

इसलिए किसी इंसान को क़य्यूम कहना जाएज़ नहीं बल्कि अब्दुल कय्यूम ( कय्यूम का बंदा ) कहना चाहिए जो लोग अब्दुल कय्यूम की जगह सिर्फ कय्यूम बोलते हैं गुनाहगार होते हैं |

तीसरा जुमला : (न उसको ऊंघ आती है न नींद)

अल्लाह के सहारे ही सारी कायनात कायम है इसलिए एक आम इंसान का ख़याल इस तरफ जा सकता है कि जो ज़ात इतना बड़ा काम कर रही है उसे भी किसी वक़्त थकान होना चाहिए और कोई वक़्त आराम और नींद के लिए चाहिए
लेकिन इस जुमले में महदूद और अदना सा इल्म रखने वाले इंसान को बता दिया गया कि अल्लाह को अपने जैसा न समझे उसकी कुदरत के सामने ये काम कुछ मुश्किल नहीं और उस की ज़ात नींद और थकान से बरी है |

चौथा जुमला : (जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है)

जिसका मतलब है तमाम चीज़ें जो ज़मीन और आसमान में हैं सब अल्लाह की ही मिलकियत में हैं वो जिस तरह चाहे उस में तसर्रुफ़ करे |

पांचवां जुमला : (कौन है जो बगैर उसकी इजाज़त के उसकी सिफारिश कर सके)

मतलब ऐसा कौन है जो उस के आगे किसी की सिफारिश कर सके हाँ कुछ अल्लाह के मकबूल बन्दे हैं जिनको ख़ास तौर पर बात करने की और शिफारिश की इजाज़त दी जाएगी लेकिन बगैर इजाज़त के कोई सिफारिश नहीं कर सकता |

छठा जुमला : (वो उसे भी जनता है जो मख्लूकात के सामने है और उसे भी जो उन से ओझल है)

यानी अल्लाह उन लोगों के आगे पीछे के तमाम हालात जानता है और आगे पीछे का मतलब ये हो सकता है कि उनके पैदा होने के पहले और पैदा होने के बाद के हालत अल्लाह जानता है
और इसका मतलब ये भी हो सकता है कि वो हालात जो इंसान के सामने हैं खुले हुए है और पीछे का मतलब वो हालात जो छुपे हुए हैं |

सातवां जुमला : (बन्दे उसके इल्म का ज़रा भी इहाता नहीं कर सकते सिवाए उन बातों के इल्म के जो खुद अल्लाह देना चाहे)

इंसान और तमाम मख्लूकात अल्लाह के इल्म के किसी एक हिस्से तक भी नहीं पहुँच सकते मगर अल्लाह ही जिसको जितना इल्म अता करना चाहें सिर्फ उतना ही इल्म उसको मिल सकता है |

आठवां जुमला : (उसकी ( हुकूमत ) की कुर्सी ज़मीन और असमान को घेरे हुए है)

उसकी कुर्सी इतनी बड़ी है कि उस में सातों ज़मीन और सातों आसमान समाये हुए हैं इस किस्म की आयत को इंसान अपने ऊपर कयास न करे क्यूंकि अल्लाह की कुदरत को समझ पाना इंसान की समझ से बाहर है |

नवां जुमला : (ज़मीनों आसमान की हिफाज़त उसपर दुशवार नहीं)

अल्लाह को ज़मीन व आसमान की हिफाज़त कोई बोझ महसूस नहीं होती बल्कि उसकी कुदरत के सामने ये आसान चीज़ें हैं |

दसवां जुमला : (वह बहुत बलंद और अज़ीम ज़ात है)

यानि वो आली शान और अजीमुश शान है . पिछले नौ जुमलों में अल्लाह की जातो सिफ़ात के कमालात बयान हुए हैं उनको देखने और समझने के बाद हर अक्ल वाला इंसान यही कहने पर मजबूर है कि हर इज्ज़त, अजमत, बलन्दी व बरतरी सिर्फ अल्लाह ही को ज़ेबा है |

 

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3 comments

  1. Mashaalllah

  2. Mashallah!
    Thankyou so much

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