Jume Ka Din
जुमे की नमाज से पहले इसे पढ़कर आप अल्लाह के और करीब होंगे
इस्लाम में जुमे की नमाज सबसे ज़्यादा अहम् है। इस दिन में बेशुमार छिपे हुए खजाने हैं जो अगर बंदा उनको हासिल करने की कोशिश करे तो यक़ीनन महरूम नहीं रहेगा |
एक हफ्ते में 7 दिन होते हैं और इन दिनों का बादशाह जुमे का दिन होता है। । हमारे पैगंबर मुहम्मद स.अ. ने फ़रमाया है, “सभी दिनों में, जुमे का दिन सबसे अच्छा है। और इस दिन दुरूद शरीफ़ पढ़ा करो, क्योंकि इस दिन आप जितना भी दुरूद शरीफ पढेंगे, वह सीधे मेरे पास आएगा। ”
आमतौर पर जुमे की नमाज के दौरान, ऑफिसों से लेकर शॉपिंग मॉल तक सब कुछ चलता रहता है । जो कोई भी जुमे की नमाज की तैयारी करता है, और जुमे की नमाज से पहले दुरूद शरीफ पढ़ता है, उसे तो न सिर्फ अल्लाह और रसूल राज़ी होते हैं बल्कि साथ ही साथ बड़े अजरो सवाब का हक़दार होता है ।
जुमे के दिन की ख़ास तस्बीह
इसके अलावा, जब आप अपने दोस्तों से बात करने के बजाय मस्जिद जाने के लिए घर से निकलते हैं और आप ये छोटी सी दुआ पढ़ते हैं,
“सुब हानल लाहि व बिहमदिही सुब हानल लाहिल अज़ीम”
तो यकीन जानिए कि फ़रिश्ते उस शख्स का मस्जिद में खुले हाथों से स्वागत करते हैं और खुश आमदीद कहते हैं
इन जुमे के आमाल से क्या फ़ायदे होंगे ?
इससे अक्लमंदी के साथ-साथ मुसलमान की रोहानियत में इज़ाफ़ा होता है।
यह मुसलमानों को अधिक अल्लाह के सामने आजिज़ और विनम्र बनाता है
ये खौफ़ व डर और सभी तरह के नुकसान से महफूज़ करता है ।
साथ ही, यह व्यक्ति अल्लाह के हिफाज़त में आ जाता है
और वह अल्लाह पर मुकम्मल यक़ीन रखता है और अल्लाह उसके लिए जो कुछ भी तय करता है उस पर मुतमईन रहता है।
इसके अलावा, वह शख्स अल्लाह का पसंदीदा बन जाता है।
लोग आमतौर पर इस रोहानी दिन का फ़ायदा उठाए बिना सिर्फ बातें करने और मस्ती करने में अपना दिन गुज़ार देते हैं। अल्लाह तआला फरमाते है जो कोई भी पैगंबर मुहम्मद (PBUH) से मुहब्बत रखता है वह मुझसे मुहब्बत रखता है ! फिर क्या हम पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के लिए
दुरूद शरीफ पढने और उन पर दुरूद भेजने के लिए कुछ वक्त नहीं निकाल सकते ?
अगर आप हमारे प्यारे नबी से मुहब्बत रखते हैं तो चलिए पढ़ें
Durood Shareef No. 1
Durood shareef No.2
Durood Shareef No. 3
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