Soorah Nasr In Hindi | सूरह नस्र | Iza Jaa A Nasrul Lahi
सूरह नस्र मदनी है इस में तीन आयतें हैं
दोस्तों ! सूरह लहब ( Soorah Nasr In Hindi ) आपने नमाज़ में या तिलावत के वक़्त खूब पढ़ी होगी लेकिन क्या आप ने कभी जानने की कोशिश की कि इसमें पैग़ाम क्या है और ये कब नाजिल हुई तो आप को ये जानना चाहिए कि अल्लाह ने इस में क्या नाजिल किया है
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Translation ( तर्जुमा ) Of Surah Nasr In Hindi
1.जब अल्लाह की मदद और फतह आ पहुंची
2.और आप ने देख लिया कि लोग अल्लाह के दीन में फ़ौज दर फ़ौज दाखिल हो रहे हैं
3.तो अपने परवरदिगार की तारीफ़ और पाकी बयान कीजिये और उसी से मगफिरत की दुआ फरमाइए, बेशक अल्लाह खूब तौबा कुबूल करने वाले हैं
तफसीर और तशरीह
रसूलुल लाह सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम पर अखीर ज़माने में जो सूरतें नाजिल हुईं उन में से एक ये भी है | हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर से रिवायत है कि हज्जतुल विदा के दौरान जब नबी स.अ. मिना में थे तब ये सूरत नाजिल हुई उसके बाद सूरह मायदा की आयत नंबर 3 नाजिल हुई उसके बाद आप स.अ. सिर्फ 80 दिनों दुनिया में रहे ( तफसीर क़ुरतुबी )
Soorah Lahab Hindi | सूरह लहब ( तब्बत यदा ) और उसकी तशरीह
मक्का कब फतह हुआ
इस सूरह में फतह का मतलब मक्का की फतह है , 8 हिजरी में मक्का फतह हुआ अरब लोगों का अकीदा था कि हरम शरीफ में सिक्का उसी का चल सकता है जिसके साथ अल्लाह की मदद होगी इसलिए जब मुसलमानों ने मक्का फतह किया तो लोग फ़ौज दर फ़ौज मुस्लमान होने लगे |
मक्का फतह होने के बाद मुसलमानों की तादाद
मक्का फतह होने के बाद इस्लाम की तबलीग में इतनी तेज़ी आई कि मक्का फतह होने के मौके पर आप के साथ दस हज़ार सहाबा ही थे लेकिन फतह होने के बाद दो साल से भी कम अरसे में हज्जतुल विदा के मौके पर एक लाख से भी ज्यादा हो चुके थे | और अरब से बाहर भी इस्लाम की रौशनी फ़ैल रही थी यहाँ तक कि आप की वफात के कुछ अरसे बाद हज़रात उमर र.अ. के दौर में दुनिया की दो बड़ी ताक़तें रोम और इरान इस्लाम के झंडे के नीचे आ गयीं |
इस सूरह में इस बात की तरफ इशारा है कि…
इस सूरह में इस बात की तरफ इशारा है कि अल्लाह ने जिस मकसद के लिए आपको भेजा था वो पूरा हो रहा है इस लिए अल्लाह की तस्बीह तो आप पहले भी करते थे और इस्तगफार का रूटीन भी था लेकिन अब इस रूटीन को और बढ़ा दीजिये |
हज़रत आयेशा र.अ. से रवायत है कि जब ये सूरत नाजिल हुई तो नबी स.अ.रुकू और सजदे में खूब कसरत से सुब्हानक रब्बना व बिहाम्दिका अल्लाहुम्मग फिरली पढने लगे |
हज़रत उम्मे सलमा र.अ. रिवायत करती हैं नबी स.अ. आखिर उम्र में उठते बैठते और आते जाते सुब्हानल लाहा व बिहाम्दिका अस्ताग्फिरुल्लाहा व अतूबू इलाय्ह पढ़ा करते थे |
अगरचे इस सूरह में नबी स.अ.को तस्बीह और इस्तगफार का हुक्म दिया गया है लेकिन कुछ सहाबा इस सूरह को सुन कर समझ गए कि इस में नबी स.अ.की वफात का भी इशारा है और 80 दिनों बाद नबी स.अ. की वफात हुई |
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भाई आपकी पोस्ट तो एकदम सही है, लेकिन इस सुराह में सिर्फ 3 आयत है, आपने 4 आयत का व्याख्यान कर दिया है, बल्कि 3 और 4 आयत एक में ही मिली हुई हैं, आपने उसको अलग अलग लिख दिया है। उसको एक में करके लिखिए वरना लोगो को लगेगा इसमें 4 आयत हैं।
shukriya bhai correction ke liye. maine use correct kar diya.