Tauba Qabool Hone Ki Nishaniyan
तौबा कुबूल होने की निशानियाँ क्या हैं ?
आदम अ.स. की औलाद को तौबा कैसे मिली ?
जब आदम अ.स. को अल्लाह ने बनाया फिर सभी फरिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो उन्ही में इब्लीस ( शैतान ) भी था उसको आदम अ.स. से जलन हुई और उसने अल्लाह के हुक्म को मानने से यानि सजदा करने से इनकार कर दिया तो अल्लाह ने उसको जन्नत से निकाल दिया |
जब शैतान जन्नत से भगाया गया तो उसने कुछ चीज़ें अल्लाह से मांगी तो अल्लाह ने उसे दे दी इसलिए कि उसने अल्लाह की बहुत इबादत की थी | उसने माँगा था कि जितनी आदम की औलादें हों उतनी मेरी भी औलादें हों ये उसने इसलिए माँगा था ताकि वो हर एक आदम की औलाद को बहका सके अल्लाह से उसका रुख मोड़ कर गैरुल्लाह की तरफ़ कर दे |
अल्लाह ने उसे सब कुछ दिया लेकिन आदम की औलाद को एक तौबा जैसा हथियार दे दिया कि ये शैतान कितना भी बहकाए अगर आदम की औलाद आकर तौबा कर ले तो मैं सारे गुनाह माफ़ कर दूंगा |
तौबा कुबूल होने की निशानियाँ 3 हैं
तौबा कुबूल होने की पहली निशानी ये है कि बंदा तौबा करने के बाद नेकी के कामों में लग जाता है
दूसरी निशानी ये है कि जब इंसान सच्ची तौबा करता है तो अपने आप को हल्का फुल्का महसूस करता है जैसे कि कोई बोझ हो वो उतर गया हो
तीसरी निशानी ये है कि बन्दे के दिल में अल्लाह तआला की याद उसके दिल में बैठ जाती है और उसको अल्लाह के हुक्मों पर चलना अच्छा लगने लगता है
हज़रत उमर र.अ. और तौबा
हज़रत उमर र.अ. फरमाते हैं कि मुझे आज तक कुबूलियत का खौफ़ नहीं हुआ बस मुझे खौफ़ इस बात का है अल्लाह तआला तौबा की तौफ़ीक़ मुझसे ना छीन ले क्यूंकि तौबा की तौफ़ीक़ अल्लाह उसको देते हैं जिसकी कुबूल करनी होती है
उलमा फ़रमाते हैं जिसको चार चीज़ें मिल जाये वो चार चीज़ों से कभी महरूम नहीं होता
जिसको तौबा की तौफ़ीक़ मिल जाये, तो अल्लाह तआला तौबा की क़बूलियत से कभी उसे महरूम नहीं करते
जिसको शुक्र करने की सलाहियत अल्लाह देदे, अल्लाह उसको और ज़्यादा नेअमतों को देने से कभी महरूम नहीं करते
जिसको इस्तिखारा की तौफ़ीक़ मिल जाये, अल्लाह उसे खैर से कभी भी महरूम नहीं करते
जिसको उस्ताज़ों से, वालिदैन से, अक्लमंदों से मशवरा करने की तौफ़ीक़ मिल जाये तो कभी वो सीधे रस्ते से महरूम नहीं होता
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